INDIA ON VERGE OF CIVIL WAR from last 73 years. भारत पाकिस्तान के युद्ध से बडा होगा भारत में ग्रहयुद्ध.

INDIA ON VERGE OF CIVIL WAR from last 73 years.
भारत पाकिस्तान के युद्ध से बडा होगा भारत में ग्रहयुद्ध.

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 अरे हिंदुओं अब तो समझ जाओ गंगा जमुनी संस्कृति कुछ नहीं होती है

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम नहीं है

 ईश्वर सब की रक्षा करता है

 अल्लाह का हुक्म है कि काफिर को छोड़ो मत

नहीं समझना चाहते तो मत समझो

गंगा जमुनी संस्कृति की बात सिर्फ हिंदुओं को धोखे में रखने के लिए है

हिंदू भी दो तरह के हैं नामधारी हिंदू

जिनका केवल नाम हिंदू है
अंदर से वह ना कुछ जानते हैं न जानना चाहते हैं

अपने धर्म को ही नहीं जानते हैं दूसरे को क्या जानेंगे

और वह हिंदू जो वास्तव में हिंदू हैं

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सभी हिंदुओं को यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिए.
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पाकिस्तान के पास सबसे बड़ा हथियार उसका परमाणु बम नहीं बल्कि भारत में बसे 20 करोड़ से अधिक मुसलमान हैं !

यह बात मैं नहीं कह रहा हूँ , यह बात 1980 के दशक में जनरल जि़या उल हकं ने कह दी थी।

उसने कहा था कि जब भारत में पाकिस्तान से ज्या़दा मुसलमान हैं तो हमें वहाँ लड़ने के लिए अपने सैनिक भेजने की क्या ज़रूरत है ?

तब से पाकिस्तान ने अपनी सोच, स्ट्रेटजी बदल ली है,

तब से ही पाकिस्तान ने भारत के मुसलमानों को रेडिकलाइज़ करने में इन्वेस्ट करना शुरू कर दिया है।

हर शहर, हर गली में मदरसे, जहाँ की शिक्षा उसका जीता जागता उदाहरण है।

2014 से पहले रही काँग्रेस जैसी भारत की अपनी सरकारों और ग़द्दार नेताओं ने भी इस आग में खूब घी डाला है।

आज अगर मोटा मोटा आकलन करें तो भी कम से कम 10% मुसलमान इस्लामी कट्टर हो चुका है ! संख्या में ये कितने हुए ?

20 करोड़ का 50%, यानी दस करोड़ !

जबकि भारत के पास लगभग 15 लाख फौज है, मतलब पूरे भारत की फौज संख्या से पचास-साठ गुना ज्या़दा !

अब अगर पाकिस्तान इन्हें भारत में दंगे फसाद फैलाने का सिग्नल दे दे, जबकि हर मुस्लिम के घर मे हथियार भी है, तो आप कैसे संभालोगे ?

और जो बाकी के बचे मुस्लिम हैं वो आपके साथ खड़े होकर इसका विरोध करते नहीं दिखेंगे ! वे या तो मूकदर्शक बनकर हवा का रुख भांपेंगे, या शोर मचाएँगे कि मुसलमानों के साथ कितना अत्याचार हो रहा है !

इस शोर में सिक्यूलर मिडिया और हिन्दू विरोधी विचारधारा वाले नेता भी इनका साथ देंगे
अगर दो चार प्रतिशत मुसलमान सचमुच इसके विरोध में भी होंगे तो वे वैसे ही अप्रासंगिक होंगे जैसे 1947 के पहले भारत विभाजन के समय थे !

पिछले कुछ समय से भारत के अलग अलग शहरों में किसी न किसी बहाने से पचास हजा़र या एक लाख मुसलमान जुटते रहे हैं, उन्होंने हिंसक प्रदर्शन किया हैं ! कभी किसी हिन्दू त्योहार के मौके पर या कहीं पैगम्बर से गुस्ताखी के विरोध के बहाने से !

पता है यह सब क्या है?
ये विरोध प्रदर्शन नहीं है!
यह सब उसी मारक हथियार के मकैनिज्म़ को टेस्ट करने की पाकिस्तान की प्रक्रिया भर है !

उद्दहारण /सबूत
भारत में 1965 तक मुस्लिम रेजिमेंट सेना थी जिसमें मुस्लिम समुदाय के लोग थे, 1965 में पाकिस्तान युद्ध मे उन्होंने पाकिस्तान पर हमला करने से मना कर दिया था तब उस रेजिमेंट को तोड़ा गया था.

लेकिन सोचिए ज़रा इससे निपटने की हमारी तैयारी क्या है?

 हमारा प्रौब्लम पता है क्या है, वो ये है कि हम समझते हैं सब सरकार करेगी

जिस दिन युद्ध होगा उस दिन सरकार उतना ही करेगी, जितना सैनिक उपलब्ध होंगे उसे बाँर्डर पर भेज देगी !

वो रेल कि पटरी उखाड़ देगे, गदर मचायेंगे, लूटपाट करेंगे,

ऐसा 1947 मे कलकत्ता में देश विभाजन के समय हुआ था जो एक कढ़वी सच्चाई है। लेकिन क्या तब आप इन दस करोड़ को रोक पायेंगे ?

युद्ध जिस स्तर पर लड़ा जाता है उसका मुका़बला भी उस ही स्तर पर किया जा सकता है!

दुश्मन सामाजिक स्तर पर लड़ाई लड़ने को अपनी तैयारी लगभग पूरी कर चुका है!

लेकिन क्या हम इस दिशा में एक भी कदम आगे बढ़े हैं ?
दो टूक जवाब कढ़वा है ... नहीं!

बस सारा दिन मोदी मोदी...

वो पंचर बना लेंगे, मुर्गा मुर्गी बेच लेंगे, हजामत बना लेंगे, नहीं तो फेरी लगा कर कबाड़ खरीदेंगे बेचेंगे!

क्योंकि उन्होंने अपना लक्ष्य तय कर रखा है, वो जो भी करेंगे अपने उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ही करेंगे!

हाँ उनके कुछ लोग जो प्रशिक्षित हैं वो इन मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सीमित मात्रा में बोलते देखे जा सकते हैं, जो सिर्फ आपको व्यवस्था के प्रति आक्रोशित करने के लिए! ये वही हैं जो सिर्फ मुद्दे को लोगों के बीच उकसाते हैं और फिर अलग हो जाते हैं (जैसे जावेद अख़तर, अनुराग कश्यप,स्वरा भास्कर, विशाल ददलानी, रवीश,अभिसार, बरखा इत्यादी) और वहाँ मौजूद हम और आप, उस मुद्दे के पक्ष-विपक्ष में वाक्युद्ध में संलग्न होकर अपने आपसी रिश्ते बिगाड़ते हैं और वह तमाशा देखते हैं!

ये भी उनकी स्ट्रैटजी का हिस्सा ही है, जिसे हम हिन्दू भाँप नहीं पाते!

ऐसी विषम परिस्थिति में अब भी समय हैं कि हम समय रहते अपने बीच में एक षड्यंत्र द्वारा फैलाए जा रहे वैमनस्य पैदा करने वाले मुद्दों को पीछे छोड़ अपने अस्तित्व के संकट के प्रति एकजुट हों!

इससे निपटने का कोई एक्शन प्लान बनायें और उस पर अमल करें!

अन्यथा वह समय अब आ गया है कि हम विश्वगुरु के सपने देखते हुए अपना वर्तमान भी खो देंगे !

भविष्यवाणी 🙏🇮🇳👇

"भारत मे अगला युद्ध पाकिस्तान से होगा लेकिन वह युद्ध नहीं भारत के अंदर विश्व का सबसे बड़ा ग्रहयुद्ध होगा.

याद रखिए... 🙏👇
हिंदू बँटेगा तो कटेगा

वंदेमातरम्
जय श्री राम
जय भारत भूमि

मानो न मानो पर सच्चाई तो यही है की मुसलमान किसी काफिर का दोस्त नहीं हो सकता Believe it or not, but the truth is that Muslims cannot be friends of any Kafir

I am feeling very bad in writing the fact below which is taken from a watsapp forwarded to me.

i hope somebody will tell me that this is wrong which is written here.

Image result for islam and kafir

संछेप में...इस्लाम के प्रति महापुरुषों के विचार।।

 1. स्वामी विवेकानंद

 ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

              कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३

2.  गुरु नानक देव

मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

            - नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ७0

3. महर्षि दयानन्द सरस्वती

इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

                             -सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

  4. महर्षि अरविन्द

हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
                             - ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

 
 
 5.  सरदार वल्लभ भाई पटेल

मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
                             - संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार
 
  6. बाबा साहब भीम राव अंबेडकर

हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते।

मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
                            - प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

  7. माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी

पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।

 8. गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर

ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ;                     
                    - रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

 9. लाला लाजपत राय
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

                             पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५

  10. समर्थ गुरू राम दास जी

छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया ।

                            - डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८

 10. राजा राममोहन राय

मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

                             वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

 11. श्रीमति ऐनी बेसेन्ट

मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

                             - कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५

  12. स्वामी रामतीर्थ

अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

                             - भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ ३५-३६

कैसे कहें हम हिन्दू मुस्लिम भाई भाई????

संछेप में...इस्लाम के प्रति महापुरुषों के विचार।।

 1. स्वामी विवेकानंद

 ऎसा कोई अन्य मजहब नहीं जिसने इतना अधिक रक्तपात किया हो और अन्य के लिए इतना क्रूर हो । इनके अनुसार जो कुरान को नहीं मानता कत्ल कर दिया जाना चाहिए । उसको मारना उस पर दया करना है । जन्नत ( जहां हूरे और अन्य सभी प्रकार की विलासिता सामग्री है ) पाने का निश्चित तरीका गैर ईमान वालों को मारना है । इस्लाम द्वारा किया गया रक्तपात इसी विश्वास के कारण हुआ है ।

              कम्प्लीट वर्क आफ विवेकानन्द वॉल्यूम २ पृष्ठ २५२-२५३

2.  गुरु नानक देव

मुसलमान सैय्यद , शेख , मुगल पठान आदि सभी बहुत निर्दयी हो गए हैं । जो लोग मुसलमान नहीं बनते थें उनके शरीर में कीलें ठोककर एवं कुत्तों से नुचवाकर मरवा दिया जाता था ।

            - नानक प्रकाश तथा प्रेमनाथ जोशी की पुस्तक पैन इस्लाममिज्म रोलिंग बैंक पृष्ठ ७0

3. महर्षि दयानन्द सरस्वती

इस मजहब में अल्लाह और रसूल के वास्ते संसार को लुटवाना और लूट के माल में खुदा को हिस्सेदार बनाना शबाब का काम हैं । जो मुसलमान नहीं बनते उन लोगों को मारना और बदले में बहिश्त को पाना आदि पक्षपात की बातें ईश्वर की नहीं हो सकती । श्रेष्ठ गैर मुसलमानों से शत्रुता और दुष्ट मुसलमानों से मित्रता , जन्नत में अनेक औरतों और लौंडे होना आदि निन्दित उपदेश कुएं में डालने योग्य हैं । अनेक स्त्रियों को रखने वाले मुहम्मद साहब निर्दयी , राक्षस व विषयासक्त मनुष्य थें , एवं इस्लाम से अधिक अशांति फैलाने वाला दुष्ट मत दसरा और कोई नहीं । इस्लाम मत की मुख्य पुस्तक कुरान पर हमारा यह लेख हठ , दुराग्रह , ईर्ष्या विवाद और विरोध घटाने के लिए लिखा गया , न कि इसको बढ़ाने के लिए । सब सज्जनों के सामन रखने का उद्देश्य अच्छाई को ग्रहण करना और बुराई को त्यागना है ।।

                             -सत्यार्थ प्रकाश १४ वां समुल्लास विक्रमी २०६१

  4. महर्षि अरविन्द

हिन्दू मुस्लिम एकता असम्भव है क्योंकि मुस्लिम कुरान मत हिन्दू को मित्र रूप में सहन नहीं करता । हिन्दू मुस्लिम एकता का अर्थ हिन्दुओं की गुलामी नहीं होना चाहिए । इस सच्चाई की उपेक्षा करने से लाभ नहीं ।किसी दिन हिन्दुओं को मुसलमानों से लड़ने हेतु तैयार होना चाहिए । हम भ्रमित न हों और समस्या के हल से पलायन न करें । हिन्दू मुस्लिम समस्या का हल अंग्रेजों के जाने से पहले सोच लेना चाहिए अन्यथा गृहयुद्ध के खतरे की सम्भावना है । ।
                             - ए बी पुरानी इवनिंग टाक्स विद अरविन्द पृष्ठ २९१-२८९-६६६

 
 
 5.  सरदार वल्लभ भाई पटेल

मैं अब देखता हूं कि उन्हीं युक्तियों को यहां फिर अपनाया जा रहा है जिसके कारण देश का विभाजन हुआ था । मुसलमानों की पृथक बस्तियां बसाई जा रहीं हैं । मुस्लिम लीग के प्रवक्ताओं की वाणी में भरपूर विष है । मुसलमानों को अपनी प्रवृत्ति में परिवर्तन करना चाहिए । मुसलमानों को अपनी मनचाही वस्तु पाकिस्तान मिल गया हैं वे ही पाकिस्तान के लिए उत्तरदायी हैं , क्योंकि मुसलमान देश के विभाजन के अगुआ थे न कि पाकिस्तान के वासी । जिन लोगों ने मजहब के नाम पर विशेष सुविधांए चाहिंए वे पाकिस्तान चले जाएं इसीलिए उसका निर्माण हुआ है । वे मुसलमान लोग पुनः फूट के बीज बोना चाहते हैं । हम नहीं चाहते कि देश का पुनः विभाजन हो ।
                             - संविधान सभा में दिए गए भाषण का सार
 
  6. बाबा साहब भीम राव अंबेडकर

हिन्दू मुस्लिम एकता एक अंसभव कार्य हैं भारत से समस्त मुसलमानों को पाकिस्तान भेजना और हिन्दुओं को वहां से बुलाना ही एक हल है । यदि यूनान तुर्की और बुल्गारिया जैसे कम साधनों वाले छोटे छोटे देश यह कर सकते हैं तो हमारे लिए कोई कठिनाई नहीं । साम्प्रदायिक शांति हेतु अदला बदली के इस महत्वपूर्ण कार्य को न अपनाना अत्यंत उपहासास्पद होगा । विभाजन के बाद भी भारत में साम्प्रदायिक समस्या बनी रहेगी । पाकिस्तान में रुके हुए अल्पसंख्यक हिन्दुओं की सुरक्षा कैसे होगी ? मुसलमानों के लिए हिन्दू काफिर सम्मान के योग्य नहीं है । मुसलमान की भातृ भावना केवल मुसमलमानों के लिए है । कुरान गैर मुसलमानों को मित्र बनाने का विरोधी है , इसीलिए हिन्दू सिर्फ घृणा और शत्रुता के योग्य है । मुसलामनों के निष्ठा भी केवल मुस्लिम देश के प्रति होती है । इस्लाम सच्चे मुसलमानो हेतु भारत को अपनी मातृभूमि और हिन्दुओं को अपना निकट संबधी मानने की आज्ञा नहीं देता । संभवतः यही कारण था कि मौलाना मौहम्मद अली जैसे भारतीय मुसलमान भी अपेन शरीर को भारत की अपेक्षा येरूसलम में दफनाना अधिक पसन्द किया । कांग्रेस में मुसलमानों की स्थिति एक साम्प्रदायिक चौकी जैसी है । गुण्डागर्दी मुस्लिम राजनीति का एक स्थापित तरीका हो गया है । इस्लामी कानून समान सुधार के विरोधी हैं । धर्म निरपेक्षता को नहीं मानते।

मुस्लिम कानूनों के अनुसार भारत हिन्दुओं और मुसलमानों की समान मातृभूमि नहीं हो सकती । वे भारत जैसे गैर मुस्लिम देश को इस्लामिक देश बनाने में जिहाद आतंकवाद का संकोच नहीं करते ।
                            - प्रमाण सार डा अंबेडकर सम्पूर्ण वाग्मय , खण्ड १५१

  7. माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर श्री गुरू जी

पाकिस्तान बनने के पश्चात जो मुसलमान भारत में रह गए हैं क्या उनकी हिन्दुओं के प्रति शत्रुता , उनकी हत्या , लूट दंगे, आगजनी , बलात्कार , आदि पुरानी मानसिकता बदल गयी है , ऐसा विश्वास करना आत्मघाती होगा । पाकिस्तान बनने के पश्चात हिन्दुओं के प्रति मुस्लिम खतरा सैकड़ों गुणा बढ़ गया है । पाकिस्तान और बांग्लादेश से घुसपैठ बढ़ रही है । दिल्ली से लेकर रामपुर और लखनउ तक मुसलमान खतरनाक हथियारों की जमाखोरी कर रहे हैं । ताकि पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण करने पर वे अपने भाइयों की सहायता कर सके । अनेक भारतीय मुसलमान ट्रांसमीटर के द्वारा पाकिस्तान के साथ लगातार सम्पर्क में हैं । सरकारी पदों पर आसीन मुसलमान भी राष्ट्र विरोधी गोष्ठियों में भाषण देते हें । यदि यहां उनके हितों को सुरक्षित नहीं रखा गया तो वे सशस्त्र क्रांति के खड़े होंगें ।

 8. गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर

ईसाई व मुसलमान मत अन्य सभी को समाप्त करने हेतु कटिबद्ध हैं । उनका उद्देश्य केवल अपने मत पर चलना नहीं है अपितु मानव धर्म को नष्ट करना है । वे अपनी राष्ट्र भक्ति गैर मुस्लिम देश के प्रति नहीं रख सकते । वे संसार के किसी भी मुस्लिम एवं मुस्लिम देश के प्रति तो वफादार हो सकते हैं परन्तु किसी अन्य हिन्दू या हिन्दू देश के प्रति नहीं । सम्भवतः मुसलमान और हिन्दू कुछ समय के लिए एक दूसरे के प्रति बनवटी मित्रता तो स्थापित कर सकते हैं परन्तु स्थायी मित्रता नहीं । ;                     
                    - रवीन्द्र नाथ वाडमय २४ वां खण्ड पृच्च्ठ २७५ , टाइम्स आफ इंडिया १७-०४-१९२७ , कालान्तर

 9. लाला लाजपत राय
मुस्लिम कानून और मुस्लिम इतिहास को पढ़ने के पश्चात मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि उनका मजहब उनके अच्छे मार्ग में एक रुकावट है । मुसलमान जनतांत्रिक आधार पर हिन्दुस्तान पर शासन चलाने हेतु हिन्दुओं के साथ एक नहीं हो सकते । क्या कोई मुसलमान कुरान के विपरीत जा सकता है ? हिन्दुओं के विरूद्ध कुरान और हदीस की निषेधाज्ञा की क्या हमें एक होने देगी ? मुझे डर है कि हिन्दुस्तान के ७ करोड़ मुसलमान अफगानिस्तान , मध्य एशिया अरब , मैसोपोटामिया और तुर्की के हथियारबंद गिरोह मिलकर अप्रत्याशित स्थिति पैदा कर देंगें ।

                             पत्र सी आर दास बी एस ए वाडमय खण्ड १५ पृष्ठ २७५

  10. समर्थ गुरू राम दास जी

छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरू अपने ग्रंथ दास बोध में लिखते हैं कि मुसलमान शासकों द्वारा कुरान के अनुसार काफिर हिन्दू नारियों से बलात्कार किए गए जिससे दुःखी होकर अनेकों ने आत्महत्या कर ली । मुसलमान न बनने पर अनेक कत्ल किए एवं अगणित बच्चे अपने मां बाप को देखकर रोते रहे । मुसलमान आक्रमणकारी पशुओं के समान निर्दयी थे , उन्होंने धर्म परिवर्तन न करने वालों को जिन्दा ही धरती में दबा दिया ।

                            - डा एस डी कुलकर्णी कृत एन्कांउटर विद इस्लाम पृष्ठ २६७-२६८

 10. राजा राममोहन राय

मुसलमानों ने यह मान रखा है कि कुरान की आयतें अल्लाह का हुक्म हैं । और कुरान पर विश्वास न करने वालों का कत्ल करना उचित है । इसी कारण मुसलमानों ने हिन्दुओं पर अत्यधिक अत्याचार किए , उनका वध किया , लूटा व उन्हें गुलाम बनाया ।

                             वाङ्मय-राजा राममोहन राय पृष्ट ७२६-७२७

 11. श्रीमति ऐनी बेसेन्ट

मुसलमानों के दिल में गैर मुसलमानों के विरूद्ध नंगी और बेशर्मी की हद तक तक नफरत हैं । हमने मुसलमान नेताओं को यह कहते हुए सुना है कि यदि अफगान भारत पर हमला करें तो वे मसलमानों की रक्षा और हिन्दुओं की हत्या करेंगे । मुसलमानों की पहली वफादार मुस्लिम देशों के प्रति हैं , हमारी मातृभूमि के लिए नहीं । यह भी ज्ञात हुआ है कि उनकी इच्छा अंग्रेजों के पश्चात यहां अल्लाह का साम्राज्य स्थापित करने की है न कि सारे संसार के स्वामी व प्रेमी परमात्मा का का । स्वाधीन भारत के बारे में सोचते समय हमें मुस्लिम शासन के अंत के बारे में विचार करना होगा ।

                             - कलकत्ता सेशन १९१७ डा बी एस ए सम्पूर्ण वाङ्मय खण्ड, पृष्ठ २७२-२७५

  12. स्वामी रामतीर्थ

अज्ञानी मुसलमानों का दिल ईश्वरीय प्रेम और मानवीय भाईचारे की शिक्षा के स्थान पर नफरत , अलगाववाद , पक्षपात और हिंसा से कूट कूट कर भरा है । मुसलमानों द्वारा लिखे गए इतिहास से इन तथ्यों की पुष्टि होती है । गैर मुसलमानों आर्य खालसा हिन्दुओं की बढ़ी संख्या में काफिर कहकर संहार किया गया । लाखों असहाय स्त्रियों को बिछौना बनाया गया । उनसे इस्लाम के रक्षकों ने अपनी काम पिपासा को शान्त किया । उनके घरों को छीना गया और हजारों हिन्दुओं को गुलाम बनाया गया । क्या यही है शांति का मजहब इस्लाम ? कुछ एक उदाहरणों को छोड़कर अधिकांश मुसलमानों ने गैरों को काफिर माना है ।

                             - भारतीय महापुरूषों की दृष्टि में इस्लाम पृष्ठ ३५-३६

कैसे कहें हम हिन्दू मुस्लिम भाई भाई????

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जितनी भी यूट्यूब
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हर बिजनेस की तरह
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डील सही नहीं
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Ashok Gupta Kinkar, who has spent 41 years of his life in Imports and Exports
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His last 40 years  experience in Imports and Exports is :
5 years in West Germany :  where he was  doing imports of Handicrafts, Garments,
Jewelry, Paintings, Agarbattis, Pickles when he was 25 years old.
5 years in Dubai :  Gold and Diamond
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11 Years in USA :  Gold and Diamond and
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war is on. Hindus you can not run away from war.

आप युद्ध रत हैं, भाग नहीं सकते।

पिता जी अपने बेटे को कुछ समझाते हुए महाभारत का संदर्भ दे रहे हैैं।

संदर्भ - कश्मीर हो या कैराना। बेटा, संघर्ष से जहाँ तक हो सके,  बचना चाहिए !

महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में। यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते तुम पूरा राज्य रखो, पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो। वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे।

बेटे ने पूछा - "पर इतना अनुचित प्रस्ताव लेकर कृष्ण गए क्यों थे ? अगर दुर्योधन स्वीकार कर लेता तो?

पिता :- नहीं करता। कृष्ण को पता था कि वह प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेगा। उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था।

फिर कृष्ण ऐसा प्रस्ताव लेकर गए ही क्यों थे?

वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना हठी, कितना अन्यायी था। वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे,
कि देख लो बेटा... युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा हर हाल में,
अब भी कोई शंका है तो निकाल दो अपने मन से। तुम कितना भी संतोषी हो जाओ, कितना भी चाहो कि घर में चैन से बैठूँ दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही। लड़ना.... या ना लड़ना -
तुम्हारा विकल्प नहीं है।

फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही कि
सब अपने ही तो बंधु बांधव हैं, कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक समझाया, फिर भी शंका थी।

ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है ना ! दुर्योधन को कभी शंका नही थी। उसे हमेशा पता था कि उसे युद्ध करना ही है। उसने गणित लगा रखा था।

हिन्दुओं को भी समझ लेना होगा कि:-
कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं, यह आपका ऑप्शन नहीं है। आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया। देश के दो टुकड़े मंजूर कर लिए, उस में भी हिंदू ही खदेड़ा गया अपनी जमीन जायदाद ज्यों की त्यों छोड़कर।

हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया, हज के लिए सबसीडी देकर देख ली, उनके लिए अलग नियम
कानून (धारा 370) बनवा कर देख लिए।

आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकने वाली।

उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है, उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है।

उन्हें सबसे प्यारी वही मस्जिदें हैं, जो हजारों साल पुराने आपके ऐतिहासिक मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं।

उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है जो मंदिरों की घंटियों और पूजा-पंडालों से है।

ये माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी,
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली,
यह हमारे घर तक आने वाली है...
हमारी बहू-बेटियों तक जाने वाली है

आज का तर्क है:-
तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है ?
हम तो काट कर खाएँगे
हमारे मजहब में लिखा है !

कल कहेंगे,
तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह अपना खूबसूरत चेहरा ढके बिना घर से निकलती ही क्यों है ? हम तो उठा कर ले जाएँगे।"

उन्हें समस्या गाय से नहीं है,
हमारे "अस्तित्व" से है।

तुम जब तक हो,
उन्हें कुछ ना कुछ प्रॉब्लम रहेगी।

इसलिए हे अर्जुन, और संदेह मत करो, कृष्ण घंटे भर की क्लास बार-बार नहीं लगाते।

25 साल पहले कश्मीरी हिन्दुओं का सब कुछ छिन गया, वे शरणार्थी कैंपों में रहे, पर फिर भी वे आतंकवादी नहीं बने। जबकि कश्मीरी मुस्लिमों को सब कुछ दिया गया, वे फिर भी आतंकवादी बन कर जन्नत को जहन्नुम बना रहे हैं।

पिछले साल की बाढ़ में सेना के जवानों ने जिनकी जानें बचाई, वो आज उन्हीं जवानों को पत्थरों से कुचल डालने पर आमादा हैं।

इसे ही कहते हैं संस्कार !!
ये अंतर है "धर्म" और "मजहब" में..!!

एक जमाना था जब लोग मामूली चोर के जनाजे में शामिल होना भी शर्मिंदगी समझते थे। और एक ये गद्दार और देशद्रोही लोग हैं जो खुले आम... पूरी बेशर्मी से एक आतंकवादी के जनाजे में शामिल हैं..!

सन्देश साफ़ है,,
एक कौम, देश और तमाम दूसरी कौमों के खिलाफ युद्ध छेड़ चुकी है।

अब भी अगर आपको नहीं दिखता है तो यकीनन आप अंधे हैं ! या फिर शत प्रतिशत देश के गद्दार..!!

आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका...
लेकिन हमारी अमरनाथ यात्रा हर साल बाधित होती है !
फिर भी हम ही असहिष्णु हैं.....?

ये तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है भाई !!

दुर्योधन का नजरिया साफ था उनका नजरिया भी साफ है।

आप के लिये कृष्ण अलग से नही आयेंगे। आपको क्या करना है यह आप खुद तय करना है।

अभी भी वक्त है संभल जाओ नही तो चौथी पांचवीं पीढ़ी आपके नाम से रोयेगी और उसके साथ होने वाले अत्याचारों के लिए आपको ही दोषी ठहरायेगी। क्योंकि आपने समय रहते सही कदम नहीं उठाये।

7/8 Metal scrap from Dubai UAE Import Export Business.Full Hindi transla...









Video no. 7/8
मेटल स्क्रैप भाग 2
अभी हमारी वीडियो प्रोफेशनली
ठीक नहीं है
मगर आप इसकी
टेक्निकल मैं ना
जा कर यह
देखे कि इसमें
आपको बताया क्या
जा रहा है
मुख्य बात यह
है कि हमारी
जितनी भी वीडियो
हैं वह हम
लोग खुद विदेशों
में जाकर इस
काम को करते
रहे हैं और
हमारे ऑफिस जो
दुबई चाइना और
अमेरिका में है
वहां यह काम
हमारे ऑफिसों द्वारा
किया जाता है
और आपको उन
ऑफिसों की पूरी
सहायता रहती है
हम सिखाते नहीं हैं
हम तो पूरा
काम ही आपको
करा देते हैं
कोई आपको खरीदार
या सप्लायर ढूंढने
की आवश्यकता नहीं
है सारा काम
इंपोर्ट एक्सपोर्ट का हमारे
मैनेजर आपके साथ
खड़े होकर कराते
हैं यह ट्रेनिंग
कोर्स नहीं है
यह बिजनेस को
right  away स्टार्ट करना
है
==
पिछली बार हमने
बात की थी
एक्सपोर्ट इंपोर्ट में हमें
क्या करना चाहिए
हम एक्सपोर्ट भी
कर सकते हैं
इंपोर्ट भी कर
सकते हैं यह
वाली वीडियो इंपोर्ट
के बारे में
 पिछली बार हमने
लिया था कौन
से मेटल कौन
से कंट्री से
आता है और
बिकता है
इस वीडियो में बता
रहे हैं कि
कहां से लेना
है फिर आगे
क्या करना है
देखिए हर कंट्री
से मेटल स्क्रैप
आता है कहां
से चुनना है
यह हमारी अपनी
चॉइस है पार्टी
के साथ बैठकर
हम ही चॉइस
करते हैं
जैसे शादी के
लिए एक प्रकार
की दुल्हन चाहिए
जो हर एक
से उसकी चॉइस
पूछ कर बात
करते हैं
चलिए हम ने
मान लिया दुबई
से मंगाना है
जाने से पहले
इंटरनेट से मालूम
कर लेते हैं
कौन से सप्लायर
हैं उनसे रेट
ले लेते हैं
यूट्यूब पर यही
बात बताई जाती
है क्योंकि हम
बहुत से लोगों
को हम करा
चुके हैं हमारी
रिप्रेजेंटेटिव पार्टी के साथ
दुबई जाते हैं
वहां से इस
काम को कर
आते हैं
हमें मालूम है वहां
कौन से सप्लायर्स
हैं यह मेहनत
आपको करने की
आवश्यकता नहीं पड़ती
है हमें सप्लायर्स
भी मालूम है
वहां के रेट्स
भी मालूम है

दुबई के हम
उनके yards में जाते
हैं माल को
देखते हैं इंडिया
का रेट मालूम
होता है यह
कैसे मालूम चलता
है वह भी
हम बताते हैं
जब रेट
गया तो हमें
पता है कितना
खर्चा लगता है
शिपिंग एक्सपेंसेस क्या है
यह सब हम
कैलकुलेट करके बताते
हैं
 मान लिया
कोई lot 250$ per ton बिक रही
है जाने का
खर्चा $20 per ton  है
तो हमारी जो
टारगेट प्राइस $230 की आई
 हम अपनी
कैलकुलेशन लगाते हैं कितना
सस्ता लेना है
मान लिया मांग
लिया 10 परसेंट का प्रॉफिट
लेना है तो  $25 सस्ता
लेना होगा यह
बात करते हैं
कि क्या रेट
में हमें दे
रहे हैं वहां
नेगोशिएशन करना पड़ता
है yards में हम
आपको लेकर जाते
हैं आपके सामने
नेगोशिएशन करते हैं 
 सारी बातें
youtube पर5 से 10 मिनट में
यह नहीं बताया
जा सकता लेकिन
बेसिक तरीका यह
है कि हमने
अपनी आंखों के
सामने  लोड
कराना है उसके
बाद एक Seal लग
जाती है आपके
सामने लगानी है
उस सील पर
अपना सिग्नेचर कर
सकते हैं जिससे
वह टूटे नहीं
इतनी सावधानी के
साथ वह माल
मुंबई जाता
है मुंबई आने
के बाद शिपिंग
कंपनी जहां भी
आप रहते हैं
वहां माल को
पहुंचा देती है
पंजाब में लुधियाना
मंडी गोविंदगढ़ एक
बहुत अच्छी है  माल
बिकता है भिवाड़ी
में पूरे हिंदुस्तान
में हजारों furnace है

 माल बिकता
है और बहुत
अच्छे ढंग से
बिकता है बहुत
शॉर्टेज है इंडिया
में कस्टम ड्यूटी
वगैरह देकर इस
माल को छुड़ा
लेते

लेकिन हम आपको
ऐसा तरीका बताएंगे
की माल को
छुड़ाने की आवश्यकता
ना पड़े
कस्टम देने की
आवश्यकता पड़े क्योंकि
हमारी फर्निश में
जानकारी है तो
हम आपका उनसे
कांटेक्ट करा देते
हैं तो बिल
आफ लडिंग ही
आप देकर माल
को भेज सकते
हैं


उसमें आप देखेंगे
बिल आफ लडिंग
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट उसको वह
देकर पार्टी छोड़
सकती हैं ड्यूटी
वगैरा जीएसटी सब
उसी को देना
होता है एक
बहुत आसान तरीका
है कि आपने
लोड कराया और
हाई सी सेल
कर दिया और
उस पार्टी ने
छुड़ाया ना 
कोई जीएसटी देना पड़ेगा
ना customs देना पड़ा

Customs कोई
प्रॉब्लम नहीं है
लेकिन टाइम लगता
है वह आपका
टाइम भी बच
जाएगा जब तक
आपका माल समुद्र
में है तब
आप उसको भेज
सकते हैं Legally गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया का
रेगुलेशन है इंटरनेशनल
रेगुलेशन भी है
आप आराम से
उसको बेच सकते
हैं और अपना
प्रॉफिट ले सकते
हैं
यह माल इंडिया
में गया
और प्रॉफिट के
साथ यह बिक
जाता है कितना
माल बिक जाता
है

इतनी डिमांड ज्यादा है
कि इंडिया इज
लार्जेस्ट इंपोर्टर
क्योंकि बड़ा देश
है

 बहुत अच्छा
पोजीशन है हम
बातों को जो
इस काम को
करना चाहते हैं
हमारे रिप्रेजेंटेटिव उनके
साथ दुबई अफ्रीका
अमेरिका जाते हैं
हमारे इंस्टिट्यूट के
पैकेज में माल
की पहचान करना
जहां से माल
बिक रहा है
वहां से बातचीत
करना माल खरीदना
यह सब पैकेज
में शामिल होता
है आप हमारे
साथ जाते हैं
ऐसा नहीं कि
हम चले गए
और माल हमने
खरीद लिया आप
हमारे साथ जाते
हैं जिससे आपको
सीखने को मिलता
है

जब तक आप
चाहे हम आपके
साथ रहते हैं
उसके बाद स्वयं
आप इस काम
को कर सकते
हैं कोई इतना
मुश्किल काम नहीं
है शुरू में
एक झिझक होती
है वह दूर
हो जाती है
बारीकियां भी होती
हैं कोई गलती
ना हो जाए
इसलिए एक ऐसे
इंस्टिट्यूट की आपको
जरूरत होती है
जो इस काम
को कर चुके
हैं

इनवॉइस कितने प्रकार की
एलसी कितने प्रकार
की यह चीजें
आपको बहुत ही
यूट्यूब में मिल
जाएंगे जो क्लासेज  लगाते
हैं courses कराते हैं वहां
से आपको मिल
जाएगा

 एक्चुअल काम कैसे
करना है वह
हमारे इंस्टिट्यूट में
आपको समझाई जाती
हैं कि किस
तरह से इस
काम को आसानी
से कर सकते
हैं yards में हम
आपको लेकर जाते
हैं आपके सामने
Negotiate करते हैं

 देसी तरीका
है कि हमने
अपनी आंखों के
सामने लोड कर
आया लोड कराना
है उसके बाद
seal लग जाती है
आपके सामने लगानी
है उसी पर
अपना सिग्नेचर कर
सकते हैं जिससे
वो टूटे नहीं

इतनी सावधानी के साथ
माल मुंबई
जाता है मुंबई
आने के बाद
शिपिंग कंपनी जहां भी
आप रहते हैं
वहां माल को
पहुंचा देती है
पंजाब में लुधियाना
मंडी गोविंदगढ़ एक
बहुत अच्छी है
जाएं माल बिकता
है भिवाड़ी में
पूरे हिंदुस्तान में
हजारों furnace फर्नेस  हैं

और अपनी कंपनी
का आईपीओ निकालना
हो तो भी
हमारी इंस्टिट्यूट आपको
पूरी जानकारी भी
देता है और
निकलवा तभी है
आपको कुछ नहीं
करना है केवल
आपको हमारा सहयोग
लेना है यह
सारी जानकारी हमारे
आईपीओ में वर्कशॉप
में दी जाती
है या कंसलटेंसी
में दी जाती
है

 बहुत अच्छा
काम है आज
हमने आपको बताया  किस
तरह से मंगा
सकते हैं और
उसको यहां से
किस तरह से
भेजना है - High Seas Sale "हाय सी
सेल"करना है
कैसे करना है
माल को छुड़ाने
की जरूरत नहीं
इंतजार करने की
जरूरत नहीं कब
पैसे आएंगे

माल लोड होते
ही आप माल
बेच सकते हैं
बहुत आसान चीज
है

हम आसान चीजें
यूट्यूब पर क्यों
बता रहे हैं
क्योंकि हमने बहुत
सी चीजें यूट्यूब
से सीखी हैं

तो हम आपको
यह बता रहे
हैं क्योंकि एक
बेसिक जानकारी हैं
क्योंकि Actual काम करना
है तो आपको
वर्कशॉप लेनी पड़ेगी
क्योंकि उसके बगैर
आप यह काम
नहीं कर सकते
एक्शन में संपर्क
में रहना चाहिए
पैसा इंवॉल्व टाइम
एंड  ,  ट्रायल  एंड
अरर Trial & Error से बहुत
गलतियां होने की
संभावना रहती है  आप
हमारी वेबसाइट देख
सकते हैं या
यूट्यूब से बेसिअवेयरनेस
हो जाती है
तस्वीर आपको पता
लग जाती है

आपका बहुत-बहुत
स्वागत है आप
हमारी वर्कशॉप में
आए नीचे लिखे  फोन
करके (9810890743) हमारे पास
सकते हैं टाइम
ले सकते हैं
किस टाइम आपको
मिलना है बड़ी
खुशी से

आप इस काम
को करने में
डरे नहीं हिचके
नहीं और जी
खोलकर इस काम
को करें

बहुत-बहुत धन्यवाद
आपने इस को
सुना लाइक शेयर
और कमेंट करिएगा
धन्यवाद राधे-राधे

These  video series are primarily for learning imports exports and business
right from scratch to profit earning in real business within very short time.


Introduction of Ashok Gupta Kinkar :
 Mr Ashok Gupta kinkar is an Businessman, now giving talk shows on the art of
imports and exports, because he has already lived and worked  5 years in
Germany ( jewellery handicraft garments agarbatti, brass  flowers pots,
shoes)  and  5 years in Dubai (gold and diamond jewellery spices and
other items) 11 years in USA with office in Manhattan dealing  ( gold,
silver and diamond jewellery , distribution of liquor wine,  bear and real
estate,  among many other businesses.  
Now he is giving workshops and
training to students,  entrepreneurs,  new and old Businessmen who
wish to grow up to public limited level he is also guiding in IPO (Initial
Public Offer) so that they can bring out  their own Public Issue.
How these workshops are different ?
The difference in his coaching/ training and other institutes is, that Mr
kinkar is an experience Businessman himself with 40 year in actual imports and
exports  business with his associate offices  in USA,  China,
 Dubai,  and India.
More information you can get by
Google his name –“ Ashok Gupta kinkar “ – and  going to his website
importexportsbusiness dot kom. Thanks & Regards , Import Export Academy
Delhi Phone : 9810890743
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These  video series are primarily for learning imports exports and business
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 Aim :  to give an insider
view about imports exports and business by the video clips here and you can go
to our website “ importexportsbusiness” dotkom .
Training for job and business :
 import export Academy Delhi,
 holds 1, 3, 8 session workshops  for training.   By
attending these workshops one can get
-  a decent executive job in any import export
company because we do not teach clerical things here,  but train how to
organize a business from scratch thereby giving the company profits in lacs and
crores.
- Useful  for entrepreneurs :
 they can start import and export right after attending  our
workshops.   If you are new in business then you can be well ahead of
old timer importers and exporters because of our latest items and strategies.
 If you are already in imports
exports business then you can add such items where you can increase the profit
multifold.
 - If you want to bring out an
IPO( initial public offer) then we tell you how it is possible,  when your
trusted chartered accountant says it is not possible. 
-  If you want to open a office abroad we give
you direct help through our associate offices in USA China Dubai etc.
-  If you want to settle abroad with family with
a Green Card then we tell you all the ways and means and rules in easy language
and arrange you a legal support to make it easy and fast.
-  Apart from above we help you in many social
cause NGOs and Community help businesses.
-  For this you can come to our website”
importexportsbusiness”  dotkom or call directly our mentor
Detail about the Workshop Schdule, Venue ,
Charges, Course Details, Procedure etc.
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One interactive session of about 1.5 hrs + question answers. it
is basically a counseling session telling the scope, requirement , and the
profitability, 6 easy steps to start it  :   with tea, snacks
and study material                                                                                     =
5100
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Three interactive sessions with all above and detailed actual
problems and profits in the business  :  with tea, snacks lunch and
study material                                          =
11000
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8 interactive sessions divided in two days, in a 5 star location
in city with tea breaks, lunch and study material. This is a complete
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consultancy for real business, where our representative accompanies you to
abroad also, stands with you while buying and selling, custom clearance , etc.
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be explained to you on the basis of business and country you choose.                                               Any
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schedule, venue and fee structure.

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workshops ,

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want to go next level workshop , then you can go to next level and you will get
25 % rebate there also.


you will get free support for next 3 months after the workshops and just by
10 % you can be in touch with us for each quarter.

For programme details Contact Ms Bhawna Sharma Phone : 90131-03952

She will match your time with the workshop time and day and availability.

The Topics taken are :

Topics covered in workshop
·        
Domestic Business good
or  International Business good
·        
What education needed for
becoming an exporter or importer.
·        
Basic requirements for
opening a exim company
·        
What type of company one
should open ?
·        
Basic Requirements for a
import and export company .
·        
How to take a Export
Import Code No. EBA do it free.
·        
Import company Better or
export company, the difference
·        
Selection of product for
Export and Import
·        
Selection of items for
export and import
·        
Selection of country for
export and import
·        
How to find buyers in
other countries
·        
How to find suppliers in
other countries
·        
Export promotion councils
of Government of India
·        
Free sampling to the
Buyers in foreign country
·        
Payment methods , da, dp
cod LC Advance 
·        
Pricing  FG, Fob , C
n f , Cif
·        
Advance Payment care to
be taken
·        
Due Diligence
·        
Fema regulations and how
to comply with them.
·        
Documents required in
Export and  imports
·        
Pollution requirements
·        
Form 9
·        
Making Contract within
Exporter and Importer
·        
Certificate of Origin
·        
Inspection certificate
from International Accredited Agency
·        
High Seas Sales of the
shipments
·        
Custom clearance from
Indian ports
·        
Participating in Trade
fairs abroad
·        
Letter of Credit
·        
Credits in Exports
·        
Business without
Investment
·        
Visa requirement for USA
, China, Dubai and other countries
·        
Green Card and Doing Business
in USA
·        
Open office abroad in USA
, China, Dubai
·        
How to get job in imports
and exports
·        
Special Focus on USA ,
China, Dubai
·        
Business possibilities
other then Imports and Exports
·        
How you can go Public by
Initial Public Offer for your company IPO

Mr Ashok Gupta kinkar
 import export business Academy
Delhi India
phone 9810 890 743
thanks and regard