वो करें तो रास लीला , हम करे तो करेक्टर ढीला है


जरा इनके बयानों का विरोधाभास देखिये....

हजारों सिखों का कत्लेआम – एक गलती
कश्मीर में हिन्दुओं का नरसंहार – एक राजनैतिक समस्या

गुजरात में कुछ हजार लोगों द्वारा मुसलमानों की हत्या – एक विध्वंस
बंगाल में गरीब प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी – गलतफ़हमी

गुजरात में “परजानिया” पर प्रतिबन्ध – साम्प्रदायिक
“दा विंची कोड” और “जो बोले सो निहाल” पर प्रतिबन्ध – धर्मनिरपेक्षता

कारगिल हमला – भाजपा सरकार की भूल
चीन का 1962 का हमला – नेहरू को एक धोखा

जातिगत आधार पर स्कूल-कालेजों में आरक्षण – सेक्यूलर
अल्पसंख्यक संस्थाओं में भी आरक्षण की भाजपा की मांग – साम्प्रदायिक 

सोहराबुद्दीन की फ़र्जी मुठभेड़ – भाजपा का सांप्रदायिक चेहरा
ख्वाजा यूनुस का महाराष्ट्र में फ़र्जी मुठभेड़ – पुलिसिया अत्याचार

गोधरा के बाद के गुजरात दंगे - मोदी का शर्मनाक कांड
मेरठ, मलियाना, मुम्बई, मालेगाँव आदि-आदि-आदि दंगे - एक प्रशासनिक विफ़लता

हिन्दुओं और हिन्दुत्व के बारे बातें करना – सांप्रदायिक
इस्लाम और मुसलमानों के बारे में बातें करना – सेक्यूलर

संसद पर हमला – भाजपा सरकार की कमजोरी
अफ़जल गुरु को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद फ़ाँसी न देना – मानवीयता 

भाजपा के इस्लाम के बारे में सवाल – सांप्रदायिकता
कांग्रेस के “राम” के बारे में सवाल – नौकरशाही की गलती

यदि कांग्रेस लोकसभा चुनाव जीती – सोनिया को जनता ने स्वीकारा
मोदी गुजरात में चुनाव जीते – फ़ासिस्टों की जीत

सोनिया मोदी को कहती हैं “मौत का सौदागर” – सेक्यूलरिज्म को बढ़ावा
जब मोदी अफ़जल गुरु के बारे में बोले – मुस्लिम विरोधी

क्या इससे बड़ी दोमुँही, शर्मनाक, घटिया और जनविरोधी पार्टी कोई और हो सकती है? 


मेरे टिपण्णी : - 


कांग्रेस कि गलती नहीं, विरोधी ही आलसी एवं बेकार हैं . 


राजनीति तो ऐसे ही चलती है, आपको राजनीती नहीं आती तो इसमें कांग्रेस का क्या दोष . 

3 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

अशोक जी नमस्कार,
आपसे पूछे बिना ही मैंने इस लेख की कोपी कर अपने दोस्तों को मेल कर दी है,
आपने बाते ही इतने अच्छी तरह समझायी है,
कि मैं अपने आप को रोक न सका?

I and god said...

संदीप जी

धन्यवाद,

किसी कार्य की इससे अधिक प्रशंशा नहीं हो सकती,

ब्लोग्स में तो पूछने की कोई परंपरा है नहीं . इसलिए मोगाम्बो खुश हुआ .

मैंने खुद हरीश सिंह के ब्लॉग में से ले कर अपना शीर्षक डाल दिया .

कभी मिलिए ,

अशोक गुप्ता
दिल्ली

I and god said...

9/7/11 2:44 PM
kanu..... said...
bahut hi accha lekh hai sir

9/7/11 3:44 PM
chooti baat said...
hindu bujdil aur darpok hai
esi liye koi madir tod de kuchh
kahne ki himmat nahi karta agar koi
karta bhi hai to hamare neta sarkar
uspar turant karwahi karwate hai jese
baba ramdev ke sath ho raha hai jab sarkar hi dusman ho jay to kiski
himmat hogi enhe rokne ki
ye sab padh kar dekh kar mujhe gatak
film ka daylag yad aaya jo sani deval
kahta hai bujdil ki koi jameen nahi hoti na hi ijjat ye sab likhne padhne achha lagta hai agar es rah par chal pade to jel ki hawa khani padegi kio ki unke sath sarkar hai

9/7/11 3:55 PM
I and god said...
प्रिय कनु जी

लेख तो हरीश सिंह से लिया है , केवल शीर्षक मेरा है .
छोटी बात जी ,
हर बरी बात शुरू में छोटी ही होती है .

लेखे पर विस्तृत कमेंट्स के लिए धन्यवाद ,

पर मेरा सोचना है हिंदू बुजदिल नहीं , मूर्ख है . उसे पता ही नहीं हिंदू क्या होता है . तो हिंदू के लिए बोलना, लरना तो बहुत दूर की बात है ,

माफ करना यदि में कोई हिंदू कोन है पर ब्लॉग लिखूं तो एक कम्मेंट भी नहीं आएगा .
आपका
अशोक गुप्ता
दिल्ली