लानत है दिल्ली पर , एक बुढ्ढे को काबू नहीं कर सकी

      

अरे इस आंदोलन को काबू में करना क्या मुश्किल है ?

अरे वही पुराना तरीका क्यों नहीं लगते, कि आपने कुछ सादे कपड़ों वाली पुलिस से पत्थर बरस्वा दो , हिंसा करा दो, और अदालत क्या सभी बूढ़े को बुरा कहने लगेंगे.

अचम्भा तो मुझे मिडिया पर हो रहा है जो अन्ना के पक्ष में इतनी कवरेज कर रहा है . कौन है कांग्रेस में मिडिया का जिम्मेवार ?  क्या मीडिया को नहीं खरीद सके. लानत है ,

मुझे उम्मीद है कुछ सी आई डी वाले मेरे इन सुझावों पर अम्ल करके कल तक अन्ना बूढ़े को काबू में कर लेगें.

जय हिंद

    


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